शुक्रवार 17 अप्रैल 2026 - 13:32
मौलाना क़ायेम मेहदी ने अपनी पूरी ज़िंदगी तब्लीग़ ए दीन, तर्वीज़-ए-मआरिफ़-ए-अहले बैत और इस्लाह-ए-मआशरा में गुज़ारी।मौलाना सैयद अशरफ़ अली अल-ग़रवी

हौज़ा / मशहूर ख़तीब व मुबल्लिग़ मौलाना सैयद क़ायेम मेहदी बाराबंकवी के इंतिक़ाल पर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी सीस्तानी द०ज़ि० के नुमाइंदे हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अशरफ़ अली अल-ग़रवी साहब क़िब्ला ने ताज़ियती पैग़ाम जारी किया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,मशहूर ख़तीब व मुबल्लिग़ मौलाना सैयद क़ायेम मेहदी बाराबंकवी के इंतिक़ाल पर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी सीस्तानी द०ज़ि० के नुमाइंदे हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अशरफ़ अली अल-ग़रवी साहब क़िब्ला ने ताज़ियती पैग़ाम जारी किया:

शोक संदेश उचित इस प्रकार है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत अफ़सोस और रंज के साथ यह दुखद ख़बर मिली कि मशहूर ख़तीब व मुबल्लिग़, मौलाना सैयद क़ायेम मेहदी बाराबंकवी (ताब सऱाहु) इस फ़ानी दुनिया से दार-ए-बक़ा की तरफ़ कूच कर गए। आपकी रेहलत इल्मी और दीनी हल्कों के लिए एक बड़ा नुक़सान है, जिसकी भरपाई ज़ाहिरी तौर पर  नज़र नहीं आती।

मरहूम ने अपनी पूरी पाकीज़ा ज़िंदगी तब्लीग़-ए-दीन, तर्वीज़-ए-मआरिफ़-ए-अहले बैत (अ.स.) और इस्लाह-ए-मआशरा में गुज़ारी। आपकी ख़िताबत में असर, बयान में सोज़-ओ-गुदाज़ और फ़िक्र में पुख़्तगी साफ़ तौर पर झलकती थी, जिससे बहुत से लोग फ़ायदा उठाते रहे और राह-ए-हिदायत पाते रहे।

हम इस बड़े हादसे पर मरहूम के तमाम पसमांदगान, मुतअल्लिक़ीन और ख़ास तौर पर अहले ख़ाना की ख़िदमत में दिली ताज़ियत पेश करते हैं और बारगाह-ए-रब्बुल इज़्ज़त में दुआ करते हैं कि अल्लाह तआला मरहूम को अपनी वसीअ रहमतों में जगह अता फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद करे और उन्हें जवार-ए-रहमत में आला मक़ाम नसीब करे। साथ ही लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील और अजर-ए-जज़ील अता फ़रमाए।

ला हौल व ला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाहिल अलीय्यिल अज़ीम

अशरफ़ अल-ग़रवी
बाब-उन-नजफ़ / लखनऊ
28 शव्वाल 1447 हिजरी

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